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कुरान में पृथ्वी के लौह कोर की गहराई 5100km

सूरह अल-हदीद में एन्कोड किया गया संख्यात्मक मान पृथ्वी के लौह कोर गहराई की ओर इशारा करता है: 5,100 km।

लेखकYasir Karaसंस्थापक और प्रबंध संपादक

क्या आप जानते थे?

लोहे के أنزلنا 'अंज़लना' (उतारा गया) होने की आयत आयत 57:25 है। कुरान की शुरुआत से इसकी स्थिति: लगभग आयत 5,100 पृथ्वी के आंतरिक लोहा केंद्र की गहराई: 5,100 किमी सटीक स्थितिगत कोडिंग। पृथ्वी के केंद्र में लोहा सचमुच अंतरिक्ष से उतारा गया था—सुपरनोवा में बना और अरबों वर्ष पहले उल्कापिंडों के माध्यम से वितरित हुआ।

और हमने लोहा उतारा, जिसमें बड़ी सैनिक शक्ति और लोगों के लिए लाभ हैं

कुरान 57:25

व्याख्या

शब्द 'उतारा' (أنزلنا 'अंज़लना') लोहे की ब्रह्मांडीय उत्पत्ति का वर्णन करता है—मरते तारों में बना और पृथ्वी तक पहुंचाया। कुरान की शुरुआत से ~5,100 पर आयत की स्थिति उस गहराई को कोड करती है जहां पृथ्वी का लोहा संकेंद्रण चरम पर है। 1936 में इंगे लेहमैन द्वारा भूकंपीय तरंगों का उपयोग करके खोजा गया, कुरान के 1,300+ वर्ष बाद।

वैज्ञानिक विवरण

संख्याएँ

आयत 57:25 स्थिति: ~5,100 | आंतरिक केंद्र गहराई: 5,100 किमी | केंद्र संरचना: 85% लोहा, 10% निकल | बाहरी केंद्र शुरू: 2,890 किमी

ऐतिहासिक खोज

पृथ्वी की केंद्र संरचना भूकंप विज्ञान तक अज्ञात थी। इंगे लेहमैन ने 1936 में भूकंपीय तरंगों का विश्लेषण करके आंतरिक केंद्र की खोज की। लोहा केंद्र का अस्तित्व 20वीं सदी तक पुष्टि नहीं हुआ था।

साक्ष्य और स्रोत

साक्ष्य का स्तर: पुनरुत्पाद्य गणना

संदर्भ

  • USGS पृथ्वी आंतरिक संरचना
  • लेहमैन, इ. (1936) - आंतरिक केंद्र खोज
  • /research - सत्यापन स्क्रिप्ट और विश्लेषण देखें

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